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Rishta mera
मेरा हर एक रिश्ता
मैं, एक पिता की तरह लाद करती थी वो एक बेटी की तरह मुझे दुलारता था मैं, एक मा की तरह सीखती थी वो एक बेटी तरह मुझे सीखता था मैं, एक छोटी बहन की तरह् झगड़ती थी वो मुझे बड़ी बहन की तरह समझता था मैं,एक छोटी बह्न की तरह लापरवाह थी वो एक बड़े भाई की तरह संभालता था मैं,एक दोस्त की तरह खुशियाँ बांटती थी वो एक सच्चे दोस्त की तरह मेरे हर गम ले लेता था इतनी बड़ी दुनिया मे, मेरी छोटी सी दुनिया थी उसके साथ आज उसके बिना हर रंग फीका है दुनिया की इस भीड़ में अकेली हूँ उसके बिना रोज़ नये लोगों से तो मिलती हूँ पर दिल के धागे नहीं जोड़ पाती हर रिशता है मेरे पास बस उस् रिश्ते को ही नहीं जी पाती हालत मेरी, जल्ल बिन जैसे तड़पे, मछली!!!!!
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